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सनातन पथ

रक्षा बंधन

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परिचय

रक्षा बंधन, जिसे राखी का त्योहार भी कहा जाता है, भाई-बहन के पवित्र प्रेम और आपसी सुरक्षा के बंधन का उत्सव है। ‘रक्षा बंधन’ का शाब्दिक अर्थ है ‘सुरक्षा का बंधन’। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी (रक्षा सूत्र) बाँधती हैं, उनकी लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहनों की रक्षा का वचन देते हैं। यह त्योहार केवल रक्त संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि किसी भी स्नेहपूर्ण संबंध में रक्षा के भाव को प्रकट करता है।

कब मनाया जाता है

रक्षा बंधन हिन्दू पंचांग के अनुसार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है, इसलिए इसे श्रावणी पूर्णिमा भी कहा जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर में यह अगस्त माह में पड़ता है। श्रावण मास वैसे भी हिन्दू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दिन अपराह्न काल में राखी बाँधने का शुभ मुहूर्त होता है, हालाँकि प्रायः सुबह से ही राखी का उत्सव आरंभ हो जाता है। भद्रा काल में राखी बाँधना वर्जित माना जाता है।

पौराणिक कथा

रक्षा बंधन से अनेक पौराणिक और ऐतिहासिक कथाएँ जुड़ी हैं। भविष्य पुराण के अनुसार देव-दानव युद्ध में जब इंद्र दानवों से पराजित हो रहे थे, तब इंद्र की पत्नी शची ने विष्णु भगवान द्वारा दिया गया रक्षा सूत्र इंद्र की कलाई पर बाँधा, जिससे इंद्र को विजय प्राप्त हुई। महाभारत की कथा के अनुसार द्रौपदी ने भगवान कृष्ण की कलाई पर घाव होने पर अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर बाँधा था। कृष्ण ने इसे रक्षा बंधन मानकर द्रौपदी की सदैव रक्षा का वचन दिया और चीरहरण के समय उनकी लाज बचाई। एक अन्य कथा में राजा बलि और माता लक्ष्मी का प्रसंग आता है, जहाँ लक्ष्मी ने बलि को राखी बाँधकर विष्णु को बलि के बंधन से मुक्त कराया।

पूजा विधि

रक्षा बंधन के दिन बहनें प्रातःकाल स्नान करके पूजा की थाली सजाती हैं। थाली में राखी, रोली (कुमकुम), अक्षत (चावल), दीपक, मिठाई और नारियल रखा जाता है। भाई को आसन पर बैठाकर सबसे पहले उसके माथे पर तिलक लगाया जाता है, फिर अक्षत छिड़के जाते हैं। इसके बाद दाहिनी कलाई पर राखी बाँधी जाती है। बहन भाई की आरती उतारती है और मिठाई खिलाती है। भाई बहन को उपहार और दक्षिणा देता है तथा उसकी रक्षा का संकल्प लेता है। कुछ परिवारों में राखी बाँधते समय मंत्र उच्चारण भी किया जाता है - “येन बद्धो बली राजा, दानवेन्द्रो महाबलः।“

महत्व

रक्षा बंधन का सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व अत्यंत गहरा है। यह त्योहार भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास और कर्तव्य के पवित्र बंधन को मजबूत करता है। राखी का धागा भले ही साधारण हो, परंतु इसमें स्नेह और सुरक्षा की गहरी भावना निहित होती है। यह पर्व स्त्री सम्मान और रक्षा के संकल्प का प्रतीक भी है। आधुनिक समय में यह त्योहार रक्त संबंधों से परे जाकर सैनिकों, वृक्षों और पर्यावरण की रक्षा के रूप में भी विस्तारित हुआ है। रक्षा बंधन भारतीय संस्कृति में पारिवारिक बंधनों की अमूल्य विरासत को संजोए रखता है।