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सनातन पथ

महाशिवरात्रि

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परिचय

महाशिवरात्रि हिन्दू धर्म का एक अत्यंत पवित्र पर्व है जो भगवान शिव को समर्पित है। ‘महाशिवरात्रि’ का शाब्दिक अर्थ है ‘शिव की महान रात्रि’। यह वर्ष की सबसे अंधेरी रात मानी जाती है, जब शिव भक्त रात्रि भर जागरण करके भगवान शिव की आराधना करते हैं। यह पर्व भारत के प्रत्येक शिव मंदिर में अत्यंत धूमधाम से मनाया जाता है। काशी विश्वनाथ, सोमनाथ, महाकालेश्वर और अन्य ज्योतिर्लिंग स्थलों पर इस दिन विशेष आयोजन होते हैं।

कब मनाया जाता है

महाशिवरात्रि हिन्दू पंचांग के अनुसार माघ मास (पूर्णिमांत पंचांग) या फाल्गुन मास (अमांत पंचांग) के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। ग्रेगोरियन कैलेंडर में यह फरवरी या मार्च में पड़ती है। प्रत्येक मास की कृष्ण चतुर्दशी को ‘मासिक शिवरात्रि’ मनाई जाती है, किन्तु माघ/फाल्गुन की शिवरात्रि ‘महाशिवरात्रि’ कहलाती है और सर्वाधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है। निशिथ काल (मध्यरात्रि) में पूजा का विशेष महत्व होता है।

पौराणिक कथा

महाशिवरात्रि से अनेक पौराणिक कथाएँ जुड़ी हैं। सबसे प्रचलित कथा के अनुसार इसी रात्रि को भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। एक अन्य कथा समुद्र मंथन से जुड़ी है - जब मंथन से हालाहल विष निकला जिसने संपूर्ण सृष्टि को संकट में डाल दिया, तब भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए उस विष को पी लिया। माता पार्वती ने उनके कंठ को दबाकर विष को नीचे जाने से रोका, जिससे उनका कंठ नीला हो गया और वे ‘नीलकंठ’ कहलाए। इसी रात्रि देवताओं ने शिव की पूजा की थी। एक तीसरी मान्यता के अनुसार इसी रात शिव ने तांडव नृत्य किया था।

पूजा विधि

महाशिवरात्रि पर भक्त दिनभर उपवास रखते हैं और रात्रि भर जागरण करते हैं। शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर का अभिषेक (रुद्राभिषेक) किया जाता है। बेलपत्र, धतूरा, भाँग, आक के फूल और श्वेत फूल चढ़ाए जाते हैं। रात्रि के चार प्रहरों में चार बार शिवलिंग की पूजा की जाती है। ॐ नमः शिवाय मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया जाता है। शिव चालीसा, रुद्राष्टक और शिव महिम्न स्तोत्र का पाठ किया जाता है। शिव जी की आरती उतारी जाती है।

महत्व

महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व अत्यंत गहन है। यह रात्रि आत्मसाक्षात्कार और ध्यान के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। शिव अर्थात कल्याण - इस रात्रि में की गई साधना से जीवन में कल्याण होता है। योग परंपरा में इस रात्रि को वह समय माना जाता है जब ऊर्जा स्वाभाविक रूप से ऊपर की ओर प्रवाहित होती है। विष पीकर सृष्टि की रक्षा करने वाले शिव हमें सिखाते हैं कि सच्चा त्याग और सेवा ही जीवन का सर्वोच्च धर्म है। रात्रि जागरण अंधकार में भी सजगता बनाए रखने का प्रतीक है।