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सनातन पथ

गणेश चतुर्थी

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परिचय

गणेश चतुर्थी, जिसे विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है, भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाने वाला एक प्रमुख हिन्दू पर्व है। भगवान गणेश बुद्धि, समृद्धि और शुभ आरंभ के देवता माने जाते हैं। यह त्योहार विशेष रूप से महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में अत्यंत भव्यता से मनाया जाता है। घरों और सार्वजनिक पंडालों में गणेश जी की मूर्तियाँ स्थापित की जाती हैं और दस दिनों तक पूजा-अर्चना की जाती है।

कब मनाया जाता है

गणेश चतुर्थी हिन्दू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है। ग्रेगोरियन कैलेंडर में यह अगस्त या सितंबर माह में पड़ती है। उत्सव भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से आरंभ होकर अनंत चतुर्दशी (भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी) तक दस दिनों तक चलता है। अंतिम दिन भव्य शोभायात्रा के साथ गणेश विसर्जन किया जाता है।

पौराणिक कथा

शिव पुराण के अनुसार माता पार्वती ने स्नान करते समय अपने शरीर के उबटन से एक बालक की मूर्ति बनाई और उसमें प्राण डाल दिए। उन्होंने इस बालक को द्वार पर पहरा देने का आदेश दिया। जब भगवान शिव लौटे तो बालक ने उन्हें रोक दिया। क्रोधित शिव ने बालक का सिर काट दिया। पार्वती के विलाप पर शिव जी ने एक हाथी के बच्चे का सिर लगाकर बालक को पुनर्जीवित किया और उन्हें गणों का अधिपति ‘गणेश’ नाम दिया। सभी देवताओं ने उन्हें प्रथम पूज्य का वरदान दिया - किसी भी शुभ कार्य में सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाएगी।

पूजा विधि

गणेश चतुर्थी पर शुभ मुहूर्त में गणेश जी की मिट्टी की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जाती है। षोडशोपचार पूजा विधि से पूजन किया जाता है जिसमें आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, दक्षिणा, आरती और प्रदक्षिणा शामिल हैं। मोदक गणेश जी का प्रिय भोग है। दूर्वा घास, लाल फूल और सिंदूर विशेष रूप से अर्पित किए जाते हैं। गणेश अथर्वशीर्ष और गणपति स्तोत्र का पाठ किया जाता है। अनंत चतुर्दशी को “गणपति बाप्पा मोरया, पुढ़च्या वर्षी लवकर या” के जयघोष के साथ मूर्ति का विसर्जन किया जाता है।

महत्व

गणेश चतुर्थी का आध्यात्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं - वे सभी बाधाओं को दूर करते हैं। उनका बड़ा सिर बुद्धि और विवेक का, बड़े कान सुनने की क्षमता का, छोटी आँखें एकाग्रता का और सूँड अनुकूलनशीलता का प्रतीक हैं। यह त्योहार सामुदायिक एकता का भी माध्यम है। लोकमान्य तिलक ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान सार्वजनिक गणेशोत्सव की परंपरा आरंभ की जो आज विशाल सामाजिक उत्सव का रूप ले चुकी है।

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