विष्णु
Narayan, Hari, Keshava, Madhava, Jagannath
परिचय
भगवान विष्णु हिन्दू त्रिमूर्ति में पालनकर्ता देव हैं। वे सृष्टि की रक्षा और संचालन करते हैं। जब-जब पृथ्वी पर धर्म की हानि होती है, विष्णु अवतार लेकर अधर्म का नाश करते हैं। वैष्णव सम्प्रदाय में उन्हें परम ब्रह्म माना जाता है।
विष्णु को नारायण (जल पर शयन करने वाले), हरि (पापों को हरने वाले) और श्रीपति (लक्ष्मी के पति) के नाम से भी जाना जाता है। उनके दस प्रमुख अवतार (दशावतार) हिन्दू धर्मशास्त्र का केन्द्रीय सिद्धान्त है।
स्वरूप और प्रतीक
विष्णु का स्वरूप श्यामवर्ण (नीले रंग) का है। चार भुजाओं में शंख (पांचजन्य), चक्र (सुदर्शन), गदा (कौमोदकी) और पद्म (कमल) धारण करते हैं। वे क्षीरसागर में शेषनाग पर शयन करते हैं और उनकी नाभि से ब्रह्मा जी उत्पन्न होते हैं। उनका वाहन गरुड़ है। वे पीताम्बर (पीले वस्त्र) धारण करते हैं और वक्ष पर कौस्तुभ मणि और श्रीवत्स का चिह्न है।
पौराणिक कथाएँ
दशावतार: विष्णु के दस अवतार हैं — मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध और कल्कि। प्रत्येक अवतार धर्म की रक्षा हेतु लिया गया। कल्कि अवतार कलियुग के अन्त में होगा।
समुद्र मन्थन: विष्णु ने कूर्म (कछुए) का रूप धारण कर मन्दराचल पर्वत को अपनी पीठ पर धारण किया और मोहिनी रूप में अमृत का वितरण किया, जिससे देवताओं को अमरत्व प्राप्त हुआ।
वामन अवतार: दैत्यराज बलि की बढ़ती शक्ति को नियन्त्रित करने के लिए विष्णु ने वामन (बौने ब्राह्मण) का रूप लिया और तीन पगों में तीनों लोकों को नाप लिया।
प्रमुख मंदिर
- तिरुपति बालाजी (वेंकटेश्वर) मंदिर, आन्ध्र प्रदेश — विश्व का सबसे धनी और सर्वाधिक दर्शनार्थियों वाला मंदिर
- श्रीरंगम मंदिर, तमिलनाडु — विश्व का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर परिसर
- बद्रीनाथ मंदिर, उत्तराखण्ड — चार धामों में से एक
- जगन्नाथ मंदिर, पुरी, ओडिशा — चार धामों में से एक, रथ यात्रा के लिए प्रसिद्ध
प्रमुख त्योहार
देवशयनी एकादशी (आषाढ़) और देवउठनी एकादशी (कार्तिक) विष्णु की योगनिद्रा से जुड़े त्योहार हैं। वैकुण्ठ एकादशी वैष्णवों का सबसे महत्वपूर्ण व्रत है। प्रत्येक एकादशी विष्णु को समर्पित है। होली और दीपावली भी विष्णु अवतारों से जुड़े हैं।
संबंधित मंत्र और स्तोत्र
- अष्टाक्षर मंत्र: “ॐ नमो नारायणाय”
- द्वादशाक्षर मंत्र: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
- विष्णु सहस्रनाम: विष्णु के एक हजार नाम, महाभारत में वर्णित
- विष्णु चालीसा: चालीस छंदों में विष्णु स्तुति