Skip to content
सनातन पथ

शिव

Mahadeva, Shankar, Bholenath, Neelkanth, Mahesh

साझा करें

परिचय

भगवान शिव हिन्दू त्रिमूर्ति में संहारक और रूपान्तरक देव हैं। वे सृष्टि के विनाश और पुनर्निर्माण के देवता हैं। शैव सम्प्रदाय में उन्हें परम ब्रह्म माना जाता है। उन्हें महादेव (देवों के देव), भोलेनाथ (सरल स्वभाव वाले) और आदियोगी (प्रथम योगी) भी कहा जाता है।

शिव का स्वरूप अत्यन्त विरोधाभासी है — वे गृहस्थ भी हैं और वैरागी भी, रौद्र भी हैं और शान्त भी, नटराज भी हैं और ध्यानस्थ योगी भी। वे समस्त विरोधों में सामंजस्य के प्रतीक हैं।

स्वरूप और प्रतीक

शिव का स्वरूप अत्यन्त विशिष्ट है। जटाओं में गंगा धारण किए, मस्तक पर अर्धचन्द्र, गले में सर्पों का हार (वासुकि), तीसरा नेत्र (ज्ञान का प्रतीक), गले में नीला विष चिह्न (नीलकण्ठ), शरीर पर भस्म, हाथ में त्रिशूल और डमरू। उनका वाहन नन्दी (बैल) है। लिंग स्वरूप में उनकी सर्वाधिक पूजा होती है जो निराकार ब्रह्म का प्रतीक है।

पौराणिक कथाएँ

समुद्र मन्थन और नीलकण्ठ: देवताओं और असुरों द्वारा समुद्र मन्थन के समय भयंकर हालाहल विष निकला। सृष्टि की रक्षा हेतु शिव ने वह विष पी लिया। पार्वती ने उनका गला दबाया जिससे विष गले में ही रुक गया और उनका गला नीला हो गया, इसलिए उन्हें नीलकण्ठ कहा जाता है।

गंगा अवतरण: राजा भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर उतरने को तैयार हुईं, परन्तु उनके वेग को सहन करने की शक्ति पृथ्वी में नहीं थी। शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में धारण कर उनके प्रवाह को नियन्त्रित किया।

त्रिपुरासुर वध: तीन असुर भाइयों (त्रिपुरासुर) ने तीन अजेय नगर बनाए। शिव ने एक ही बाण से तीनों नगरों को भस्म कर दिया और त्रिपुरारि कहलाए।

प्रमुख मंदिर

  • काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी — द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सर्वाधिक प्रसिद्ध
  • केदारनाथ मंदिर, उत्तराखण्ड — हिमालय में स्थित चार धामों में से एक
  • सोमनाथ मंदिर, गुजरात — प्रथम ज्योतिर्लिंग, कई बार पुनर्निर्मित
  • रामेश्वरम मंदिर, तमिलनाडु — भगवान राम द्वारा स्थापित ज्योतिर्लिंग

प्रमुख त्योहार

महाशिवरात्रि शिव का सबसे प्रमुख त्योहार है, फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस रात भक्त उपवास और रात्रि जागरण करते हैं। श्रावण मास शिव को समर्पित है, प्रत्येक सोमवार को विशेष पूजा होती है। कांवड़ यात्रा में भक्त गंगाजल लेकर शिव मंदिरों में अभिषेक करते हैं।

संबंधित मंत्र और स्तोत्र

  • पंचाक्षरी मंत्र: “ॐ नमः शिवाय”
  • महामृत्युंजय मंत्र: “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्…”
  • शिव तांडव स्तोत्र: रावण द्वारा रचित स्तोत्र
  • रुद्राष्टकम्: तुलसीदास द्वारा रचित शिव स्तुति