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सनातन पथ

सरस्वती

Vagdevi, Sharada, Veena Vadini, Bharati

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परिचय

देवी सरस्वती ज्ञान, विद्या, बुद्धि, संगीत, कला और वाणी की अधिष्ठात्री देवी हैं। वे ब्रह्मा जी की शक्ति (पत्नी) हैं। ऋग्वेद में सरस्वती को पवित्र नदी के रूप में और बाद के ग्रन्थों में ज्ञान की देवी के रूप में वर्णित किया गया है।

सरस्वती का अर्थ है “जो सरस (प्रवाहमान) हो” — ज्ञान की धारा जो निरन्तर बहती रहती है। विद्यार्थी, कलाकार, संगीतकार, लेखक और विद्वान सरस्वती की उपासना करते हैं। उन्हें हंसवाहिनी, वीणापाणी और शुक्लवर्णा भी कहा जाता है।

स्वरूप और प्रतीक

सरस्वती का स्वरूप अत्यन्त शान्त और सात्विक है। उनका वर्ण श्वेत (शुद्धता का प्रतीक) है, श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और श्वेत कमल पर विराजमान हैं। चार भुजाओं में वीणा (संगीत और कला), पुस्तक (वेद/ज्ञान), स्फटिक माला (ध्यान और तपस्या) और कमण्डलु (पवित्रता) धारण करती हैं। उनका वाहन हंस है जो विवेक का प्रतीक है — हंस दूध और जल को अलग कर सकता है, वैसे ही सरस्वती सत्य और असत्य में भेद करने की शक्ति देती हैं।

पौराणिक कथाएँ

वाक् देवी: वैदिक साहित्य में सरस्वती को वाक् (वाणी) की देवी के रूप में वर्णित किया गया है। सभी वेदों, शास्त्रों और विद्याओं की उत्पत्ति सरस्वती की कृपा से मानी जाती है। उन्हें वेदमाता भी कहा जाता है।

सरस्वती नदी: प्राचीन काल में सरस्वती एक महान नदी थीं जो ऋग्वेद में अनेक बार वर्णित हैं। यह नदी वैदिक सभ्यता की जीवनरेखा थी। कालान्तर में यह नदी लुप्त हो गई, जिसे आज भी “गुप्त सरस्वती” कहा जाता है।

ब्रह्मा और सरस्वती: सृष्टि की रचना के समय ब्रह्मा ने सरस्वती को प्रकट किया। उनकी वीणा के स्वर से ब्रह्माण्ड में ध्वनि और लय उत्पन्न हुई तथा उनकी कृपा से जीवों को वाणी और बुद्धि प्राप्त हुई।

प्रमुख मंदिर

  • शारदा पीठ, श्रृंगेरी, कर्नाटक — आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार मठों में से एक
  • ज्ञाना सरस्वती मंदिर, बासर, तेलंगाना — गोदावरी तट पर स्थित प्रसिद्ध मंदिर
  • सरस्वती मंदिर, पिल्लयारपट्टी, तमिलनाडु — दक्षिण भारत का प्राचीन मंदिर
  • सरस्वती घाट मंदिर, वाराणसी — गंगा तट पर स्थित प्राचीन मंदिर

प्रमुख त्योहार

वसन्त पंचमी (माघ शुक्ल पंचमी) सरस्वती पूजा का सबसे प्रमुख त्योहार है। इस दिन पीले वस्त्र पहनना और पीले रंग का महत्व है। विद्यार्थी अपनी पुस्तकें और लेखनी सरस्वती के चरणों में रखकर पूजा करते हैं। नवरात्रि के प्रथम तीन दिन सरस्वती को समर्पित हैं। दक्षिण भारत में सरस्वती पूजा नवरात्रि के नवमी दिन मनाई जाती है।

संबंधित मंत्र और स्तोत्र

  • सरस्वती बीज मंत्र: “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः”
  • सरस्वती वन्दना: “या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता…”
  • सरस्वती स्तोत्र: “सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि…”
  • मेधा सूक्त: बुद्धि और स्मरण शक्ति के लिए वैदिक सूक्त