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सनातन पथ

पार्वती

Uma, Gauri, Himavati, Aparna, Shailputri

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परिचय

देवी पार्वती हिन्दू धर्म में दिव्य माता, शक्ति और प्रेम की देवी हैं। वे भगवान शिव की पत्नी और गणेश तथा कार्तिकेय की माता हैं। पार्वती पर्वतराज हिमालय और मैना की पुत्री हैं, इसलिए उन्हें हिमावती, शैलपुत्री और गिरिजा भी कहा जाता है।

पार्वती आदिशक्ति देवी सती का पुनर्जन्म हैं। सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में अपमानित होने पर अग्नि में आत्मदाह कर लिया था। पुनः हिमालय की पुत्री पार्वती के रूप में जन्म लेकर उन्होंने कठोर तपस्या द्वारा शिव को पति के रूप में प्राप्त किया। वे शिव की शक्ति हैं और अर्धनारीश्वर स्वरूप में शिव और पार्वती एक ही तत्त्व के दो पक्ष हैं।

स्वरूप और प्रतीक

पार्वती का स्वरूप सौम्य, करुणामय और मातृत्व से परिपूर्ण है। गौरी रूप में उनका वर्ण गौर (गोरा) है। वे हरे या लाल वस्त्र धारण करती हैं। दो या चार भुजाओं में कमल, दर्पण, जपमाला और आशीर्वाद मुद्रा होती है। प्रायः उन्हें शिव के वामांग (बाईं ओर) बैठी दर्शाया जाता है। उनका वाहन सिंह या बाघ है। शान्त रूप में वे गौरी हैं और रौद्र रूप में काली, दुर्गा और चण्डी।

पौराणिक कथाएँ

कठोर तपस्या: शिव सती के वियोग में गहन ध्यान में लीन थे। पार्वती ने शिव को प्रसन्न करने के लिए अत्यन्त कठोर तपस्या की। उन्होंने भोजन त्याग कर केवल सूखे पत्तों पर, फिर बिना पत्तों के (अपर्णा) तप किया। अन्ततः शिव उनकी भक्ति से प्रसन्न हुए और विवाह स्वीकार किया।

शिव की परीक्षा: विवाह से पहले शिव ने एक वृद्ध ब्राह्मण का रूप धारण कर पार्वती के समक्ष शिव की निन्दा की। पार्वती ने क्रोधित होकर कहा कि शिव चाहे जैसे भी हों, वे उन्हीं से विवाह करेंगी। शिव उनकी अटल भक्ति से प्रसन्न हुए।

अर्धनारीश्वर: शिव और पार्वती के प्रेम और एकता को दर्शाने के लिए अर्धनारीश्वर स्वरूप प्रकट हुआ — आधा शरीर शिव का और आधा पार्वती का। यह पुरुष और प्रकृति के अभेद का प्रतीक है।

प्रमुख मंदिर

  • मीनाक्षी अम्मन मंदिर, मदुरई, तमिलनाडु — पार्वती के मीनाक्षी रूप का भव्य मंदिर
  • कामाख्या मंदिर, गुवाहाटी, असम — प्रमुख शक्तिपीठों में से एक
  • किलकारी भैरव और गौरी शंकर मंदिर, दिल्ली — प्राचीन गौरी-शंकर मंदिर
  • तुलजा भवानी मंदिर, तुलजापुर, महाराष्ट्र — पार्वती के भवानी रूप का प्रसिद्ध मंदिर

प्रमुख त्योहार

गणगौर राजस्थान और मध्य प्रदेश में पार्वती (गौरी) का प्रमुख त्योहार है जो चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है। विवाहित स्त्रियाँ सुहाग की कामना करती हैं। हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है जो शिव-पार्वती विवाह से जुड़ी है। नवरात्रि में पार्वती के विभिन्न रूपों की पूजा होती है।

संबंधित मंत्र और स्तोत्र

  • पार्वती बीज मंत्र: “ॐ ह्रीं उमायै नमः”
  • गौरी स्तोत्र: “सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके…”
  • ललिता सहस्रनाम: देवी के एक हजार नाम, ब्रह्माण्ड पुराण से
  • सौन्दर्यलहरी: आदि शंकराचार्य रचित, देवी के सौन्दर्य और महिमा का वर्णन