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सनातन पथ

लक्ष्मी

Shri, Padma, Kamala, Mahalakshmi

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परिचय

देवी लक्ष्मी धन, सम्पत्ति, समृद्धि, सौन्दर्य और सौभाग्य की देवी हैं। वे भगवान विष्णु की पत्नी हैं और जहाँ विष्णु अवतार लेते हैं, वहाँ लक्ष्मी भी अवतार लेती हैं — राम के साथ सीता और कृष्ण के साथ रुक्मिणी। उन्हें श्री भी कहा जाता है, जो शुभता और ऐश्वर्य का सूचक है।

लक्ष्मी के आठ रूप (अष्टलक्ष्मी) विभिन्न प्रकार की समृद्धि का प्रतिनिधित्व करते हैं — आदिलक्ष्मी, धनलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, गजलक्ष्मी, सन्तानलक्ष्मी, वीरलक्ष्मी, विजयलक्ष्मी और विद्यालक्ष्मी।

स्वरूप और प्रतीक

लक्ष्मी जी का स्वरूप अत्यन्त मनोहर है। वे सुनहरे (स्वर्ण) वर्ण की हैं, लाल साड़ी और स्वर्ण आभूषण धारण करती हैं। चार भुजाओं में दो में कमल पुष्प हैं, एक हाथ से स्वर्ण मुद्राएँ गिर रही हैं (अभय-वरद मुद्रा) और एक हाथ आशीर्वाद दे रहा है। वे कमल के पुष्प पर विराजमान हैं। दो श्वेत हाथी उन पर जल की वर्षा करते हैं जो राज्याभिषेक और शुद्धि का प्रतीक है। उल्लू उनका वाहन है।

पौराणिक कथाएँ

समुद्र मन्थन से प्रकट होना: लक्ष्मी क्षीरसागर के मन्थन से प्रकट हुईं। कमल पर विराजमान, दिव्य सौन्दर्य से युक्त लक्ष्मी ने स्वयं भगवान विष्णु को वरमाला पहनाकर अपना पति चुना। तब से वे विष्णु के वक्षस्थल पर निवास करती हैं।

लक्ष्मी और इन्द्र: एक बार इन्द्र के अहंकार के कारण लक्ष्मी ने स्वर्गलोक छोड़ दिया जिससे देवताओं की शक्ति क्षीण हो गई। समुद्र मन्थन के बाद ही लक्ष्मी पुनः प्रकट हुईं।

महालक्ष्मी व्रत कथा: महालक्ष्मी व्रत की कथा में बताया गया है कि कैसे एक निर्धन ब्राह्मण की पत्नी ने सोलह दिनों तक महालक्ष्मी की पूजा कर सौभाग्य और समृद्धि प्राप्त की।

प्रमुख मंदिर

  • महालक्ष्मी मंदिर, कोल्हापुर, महाराष्ट्र — साढ़े तीन शक्तिपीठों में से एक, अत्यन्त प्राचीन
  • पद्मावती मंदिर (अलमेलु मंगापुरम), तिरुचानूर, आन्ध्र प्रदेश — तिरुपति के निकट प्रसिद्ध मंदिर
  • महालक्ष्मी मंदिर, मुम्बई — मुम्बई के प्राचीनतम मंदिरों में से एक
  • अष्टलक्ष्मी मंदिर, चेन्नई — लक्ष्मी के आठों रूपों को समर्पित

प्रमुख त्योहार

दीपावली लक्ष्मी पूजा का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है। कार्तिक अमावस्या की रात्रि को लक्ष्मी-गणेश की पूजा की जाती है। शरद पूर्णिमा (कोजागरी पूर्णिमा) पर रात्रि में लक्ष्मी पूजा होती है। वैभव लक्ष्मी व्रत प्रत्येक शुक्रवार को रखा जाता है। नवरात्रि के अन्तिम तीन दिन लक्ष्मी को समर्पित हैं।

संबंधित मंत्र और स्तोत्र

  • लक्ष्मी बीज मंत्र: “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः”
  • श्री सूक्त: ऋग्वेद का लक्ष्मी स्तुति सूक्त, सर्वाधिक प्राचीन
  • कनकधारा स्तोत्र: आदि शंकराचार्य रचित, धन प्राप्ति हेतु
  • महालक्ष्मी अष्टक: आठ छन्दों में महालक्ष्मी की स्तुति