गणेश
Ganapati, Vinayaka, Vighnaharta, Lambodara, Ekadanta
परिचय
भगवान गणेश हिन्दू धर्म में सर्वाधिक पूजित देवताओं में से एक हैं। उन्हें विघ्नहर्ता (बाधाओं को दूर करने वाले) और प्रथम पूज्य कहा जाता है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा या अनुष्ठान का आरम्भ सबसे पहले गणेश जी की पूजा से होता है।
वे भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र हैं तथा कार्तिकेय (स्कन्द) के भाई हैं। उन्हें बुद्धि, सिद्धि, ऋद्धि और विद्या का देवता माना जाता है। वेद व्यास ने महाभारत की रचना गणेश जी से ही लिखवाई थी।
स्वरूप और प्रतीक
गणेश जी का स्वरूप अत्यंत विशिष्ट है — गज (हाथी) का मस्तक, बड़ा उदर (लम्बोदर), चार भुजाएँ जिनमें परशु, पाश, मोदक और आशीर्वाद मुद्रा है। उनके एक दाँत टूटा हुआ है जिससे उन्हें एकदन्त कहते हैं। उनका वाहन मूषक (चूहा) है जो अहंकार पर विजय का प्रतीक है। उनके माथे पर चन्दन का तिलक और त्रिपुण्ड होता है।
पौराणिक कथाएँ
गजमुख की कथा: माता पार्वती ने स्नान से पूर्व चन्दन के लेप से गणेश की रचना की और उन्हें द्वार पर पहरा देने को कहा। जब भगवान शिव को प्रवेश से रोका गया तो क्रोध में उन्होंने गणेश का सिर काट दिया। पार्वती के विलाप पर शिव ने एक हाथी का सिर लगाकर गणेश को पुनर्जीवित किया।
मोदक और पृथ्वी प्रदक्षिणा: देवताओं ने घोषणा की कि जो सबसे पहले पृथ्वी की परिक्रमा करेगा उसे श्रेष्ठ फल मिलेगा। कार्तिकेय मयूर पर निकल पड़े, परन्तु गणेश ने अपने माता-पिता की परिक्रमा कर कहा कि माता-पिता ही सम्पूर्ण संसार हैं।
महाभारत लेखन: वेद व्यास ने गणेश जी से महाभारत लिखवाया। गणेश ने शर्त रखी कि व्यास बिना रुके बोलें, और व्यास ने शर्त रखी कि गणेश हर श्लोक का अर्थ समझकर ही लिखें।
प्रमुख मंदिर
- सिद्धिविनायक मंदिर, मुम्बई — भारत के सबसे प्रसिद्ध गणेश मंदिरों में से एक
- दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर, पुणे — महाराष्ट्र का प्रसिद्ध मंदिर
- अष्टविनायक मंदिर, महाराष्ट्र — आठ प्राचीन गणेश मंदिरों का समूह
- त्रिनेत्र गणेश मंदिर, रणथम्भौर, राजस्थान — विश्व का एकमात्र तीन नेत्रों वाला गणेश मंदिर
प्रमुख त्योहार
गणेश चतुर्थी सबसे प्रमुख त्योहार है जो भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मनाया जाता है। दस दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में गणेश प्रतिमा की स्थापना और अनन्त चतुर्दशी को विसर्जन किया जाता है। संकष्टी चतुर्थी प्रतिमास मनाई जाती है।
संबंधित मंत्र और स्तोत्र
- बीज मंत्र: “ॐ गं गणपतये नमः”
- गणेश गायत्री: “ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ती प्रचोदयात्”
- गणपति अथर्वशीर्ष: गणेश जी का प्रमुख वैदिक स्तोत्र
- संकटनाशन गणेश स्तोत्र: विघ्न निवारण हेतु पाठ किया जाता है