दुर्गा
Ambika, Chandika, Sherawali, Mahishasura Mardini
परिचय
देवी दुर्गा हिन्दू धर्म में शक्ति की सर्वोच्च अभिव्यक्ति हैं। उनका नाम ‘दुर्गा’ का अर्थ है जिसे पराजित करना दुर्गम (असम्भव) हो। वे आदिशक्ति, जगदम्बा और महादेवी के रूप में पूजित हैं। शाक्त सम्प्रदाय में उन्हें परम ब्रह्म की शक्ति माना जाता है।
दुर्गा समस्त देवताओं की संयुक्त शक्ति से प्रकट हुईं। वे बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक हैं। नवरात्रि में उनके नौ रूपों — नवदुर्गा — की पूजा की जाती है।
स्वरूप और प्रतीक
दुर्गा का स्वरूप अत्यन्त तेजस्वी है। उनके दस भुजाएँ (दशभुजा) हैं जिनमें विभिन्न देवताओं के अस्त्र-शस्त्र हैं — शिव का त्रिशूल, विष्णु का चक्र, इन्द्र का वज्र, ब्रह्मा का कमण्डलु, शंख, धनुष-बाण, खड्ग, ढाल, गदा और पद्म। उनका वाहन सिंह (शेर) है जो शक्ति और निर्भयता का प्रतीक है। उनका मुख शान्त किन्तु भव्य है, लाल वस्त्र धारण करती हैं।
पौराणिक कथाएँ
महिषासुर वध: दैत्य महिषासुर को ब्रह्मा से वरदान मिला कि कोई देव या असुर उसे नहीं मार सकेगा। उसके अत्याचार से त्रस्त देवताओं ने अपनी-अपनी शक्ति एकत्रित की जिससे देवी दुर्गा प्रकट हुईं। नौ दिनों तक भयंकर युद्ध के बाद दुर्गा ने दशमी के दिन महिषासुर का वध किया। इसीलिए उन्हें महिषासुरमर्दिनी कहा जाता है।
रक्तबीज वध: दैत्य रक्तबीज के रक्त की प्रत्येक बूँद से नया दैत्य उत्पन्न होता था। दुर्गा ने काली का रूप धारण किया जिन्होंने रक्तबीज का समस्त रक्त पीकर उसका अन्त किया।
शुम्भ-निशुम्भ वध: इन दो शक्तिशाली असुरों ने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। दुर्गा ने अनेक रूप धारण कर दोनों का संहार किया, जिसका वर्णन दुर्गा सप्तशती में है।
प्रमुख मंदिर
- वैष्णो देवी मंदिर, कटरा, जम्मू — त्रिकूट पर्वत पर स्थित अत्यन्त प्रसिद्ध शक्तिपीठ
- कामाख्या मंदिर, गुवाहाटी, असम — इक्यावन शक्तिपीठों में प्रमुख
- चामुण्डेश्वरी मंदिर, मैसूर, कर्नाटक — चामुण्डा हिल पर स्थित प्राचीन मंदिर
- दक्षिणेश्वर काली मंदिर, कोलकाता — रामकृष्ण परमहंस से जुड़ा प्रसिद्ध मंदिर
प्रमुख त्योहार
नवरात्रि दुर्गा का सबसे प्रमुख त्योहार है जो वर्ष में दो बार — चैत्र (वसन्त) और आश्विन (शारदीय) में मनाया जाता है। नौ रातों तक नवदुर्गा की पूजा होती है। दुर्गा पूजा विशेषकर पश्चिम बंगाल में भव्य रूप से मनाई जाती है। विजयादशमी (दशहरा) नवरात्रि का समापन है।
संबंधित मंत्र और स्तोत्र
- दुर्गा बीज मंत्र: “ॐ दुं दुर्गायै नमः”
- दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य): सात सौ श्लोकों में दुर्गा महिमा, मार्कण्डेय पुराण का अंश
- महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र: “अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि…”
- दुर्गा चालीसा: चालीस छन्दों में दुर्गा स्तुति