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सनातन पथ

महर्षि वाल्मीकि

ancient (traditionally Treta Yuga)

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परिचय

महर्षि वाल्मीकि भारतीय साहित्य और संस्कृति के आदिकवि (प्रथम कवि) हैं। उन्होंने संस्कृत में रामायण की रचना की, जो विश्व का प्रथम महाकाव्य माना जाता है। रामायण में भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र का वर्णन है। वाल्मीकि रामायण में लगभग 24,000 श्लोक हैं जो सात काण्डों में विभक्त हैं। उन्हें श्लोक छंद का जनक भी माना जाता है।

जीवन

महर्षि वाल्मीकि के जन्म और प्रारम्भिक जीवन के विषय में अनेक कथाएँ प्रचलित हैं। एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, वे पूर्वजन्म में रत्नाकर नामक एक डाकू थे जो राहगीरों को लूटकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। एक बार नारद मुनि उनके समक्ष आए और उनसे पूछा कि क्या उनका परिवार उनके पापों में भागीदार होगा। जब रत्नाकर ने अपने परिवार से पूछा तो सबने मना कर दिया। इस घटना से उनका हृदय परिवर्तन हुआ।

नारद मुनि ने उन्हें राम नाम का जप करने का उपदेश दिया। रत्नाकर ने इतनी गहन तपस्या की कि उनके शरीर पर दीमक (वल्मीक) ने अपना घर बना लिया। तपस्या पूर्ण होने पर वे वाल्मीकि कहलाए। ब्रह्मा जी ने प्रसन्न होकर उन्हें रामायण लिखने की प्रेरणा दी।

कहा जाता है कि एक बार तमसा नदी के तट पर उन्होंने एक शिकारी को क्रौंच पक्षी के जोड़े में से नर पक्षी को मारते देखा। मादा पक्षी के विलाप से द्रवित होकर उनके मुख से स्वतः श्लोक निकला — “मा निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः। यत्क्रौञ्चमिथुनादेकमवधीः काममोहितम्॥” — यह संस्कृत का प्रथम श्लोक माना जाता है, और इसी से उन्हें आदिकवि की उपाधि मिली।

रामायण काल में माता सीता ने वनवास के समय वाल्मीकि के आश्रम में आश्रय लिया और वहीं लव तथा कुश का जन्म हुआ। वाल्मीकि ने दोनों बालकों को शिक्षा दी और रामायण का गान सिखाया।

प्रमुख रचनाएँ

  • वाल्मीकि रामायण — संस्कृत महाकाव्य, विश्व का प्रथम काव्य। सात काण्डों (बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुन्दरकाण्ड, युद्धकाण्ड, उत्तरकाण्ड) में लगभग 24,000 श्लोक। भगवान राम के जीवन, उनके आदर्शों और धर्म की स्थापना का वर्णन।
  • योग वासिष्ठ — वाल्मीकि को कभी-कभी इस ग्रंथ का रचयिता भी माना जाता है। इसमें वसिष्ठ मुनि द्वारा श्रीराम को दिए गए आध्यात्मिक उपदेश हैं।

शिक्षाएँ

  • परिवर्तन सम्भव है — डाकू रत्नाकर से महर्षि वाल्मीकि बनने की कथा सिखाती है कि कोई भी व्यक्ति सच्चे प्रयास और तपस्या से अपना जीवन बदल सकता है।
  • करुणा ही काव्य की जननी है — क्रौंच वध से उत्पन्न करुणा ने प्रथम श्लोक को जन्म दिया। शोक से श्लोक उत्पन्न हुआ।
  • धर्म और मर्यादा — रामायण में मर्यादा पुरुषोत्तम राम के माध्यम से धर्म, कर्तव्य और सत्य के आदर्शों की स्थापना की गई है।
  • नाम जप की शक्ति — राम नाम के जप से ही रत्नाकर का उद्धार हुआ। नाम स्मरण सबसे सरल और शक्तिशाली साधना है।
  • स्त्री का सम्मान — सीता को आश्रय देकर वाल्मीकि ने स्त्री के सम्मान और रक्षा का उदाहरण प्रस्तुत किया।